Sunday, April 26, 2020

अमृत घोल ( Amrit Ghol) खेती में जान फूंक दे.

अमृत घोल


अमृत घोल की विशेषता 


01. मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) के जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि करता है।
02. शीघ्र तैयार होने वाली खाद है।
03. मिट्टी को पोली करके जल रिसाव में वृद्धि करता है।
04. मिट्टी को भुरभुरा बनाता है तथा भूमि की उत्पादकता में वृद्धि करता है।
05. फसलों पर कीट व रोगों का प्रकोप कम करता है !
06. स्थानीय संसाधनों से बनाया जा सकता है।
07. इसको बनाने की विधि सरल व सस्ती है।

आवश्यक सामग्री,

गौमूत्र-----1 ली. (देशी गाय)
गोबर------1 कि. ग्रा.
मक्खन-----250 ग्राम
गुड़---------500 ग्राम
शहद--------500 ग्राम
पानी--------10 लीटर
प्लास्टिक का पात्र/मटका------1

बनाने की विधि, 

इन स भी को एक साथ अच्छी तरह मिलाकर किसी पात्र या मटके में 7 से 10 दिन तक छाया में रखें व प्रति दिन सुबह-शाम लकड़ी से हिलाते रहें।
अब 10 लीटर पानी में 1 ली. अमृत घोल मिला कर बुआई से दो दिन पूर्व व दूसरी गुड़ाई के बाद खेत में छिड़काव करें।
 _ध्यान रखें कि इसके साथ किसी प्रकार की रासायनिक खाद, कीटनाशक या खरपतवार निवारक दवा का उपयोग न किया जाये_

उपयोग ,

▶1 बीघा भूमि के लिए 16 ली. अमृत घोल में 200 लीटर पानी मिला कर छिड़काव करें!
▶बीज बुआई से दो दिन पूर्व व दूसरी गुड़ाई के बाद इसका छिड़काव करें।

नोट - अगर किसी किसान भाईयो को कोई जानकारी अच्छी लगती है तो उसे आप अपनी डायरी में नोट जरूर करते जाये ताकि उपयुक्त समय पर आपके काम आ सके और इस लिंक को शेयर करे ताकी अन्य किसानो तक भी यह पहुच सके  !



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